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समस्तीपुर विशेष संवाददाता : समस्तीपुर के जिला मुख्यालय में बिजली का घोड़ संकट गहरा गया है

समस्तीपुर के टाउन मे अक्सर शिकायत मिलती रहती है 

समस्तीपुर विशेष संवाददाता : समस्तीपुर के जिला मुख्यालय में बिजली का घोड़ संकट गहरा गया है

समस्तीपुर विशेष संवाददाता : समस्तीपुर के जिला मुख्यालय में बिजली का घोड़ संकट गहरा गया है स्थानीय लोगो ने गर्मी की शुरुआत में ही इस पर बोलना शुरू कर दिया था । समस्तीपुर के टाउन 3 अक्सर शिकायत मिलती रहती है कभी ब्रेकर फैल तो कभी फ्यूज कॉल के समय नंबर का न मिलना समस्तीपुर में अगर आप फ्यूज कॉल के नंबर पर फोन मिलाएंगे तो आपको हर वक्त busy की मधुर धुन सुनाई देगी बड़ा सवाल यह है कि फ्यूज कॉल जैसी समस्या के लिए या फिर बिजली आपूर्ति के लिए एक ही नंबर दिया गया है जो की एक मोबाइल का होता है अब पूरे क्षेत्र का लोड एक मोबाइल पर आप डाल देंगे तो क्या होगा ! उसका व्यस्त होना स्वाभाविक है सरकार को चाहिए कि इसके लिए कॉल सेंटर की स्थापना करे बिजली एक मूलभूत सेवा है हर बार सरकार कहती है अधिकारी नपेंगे बिजली तय समय से अधिक समय तक काटने पर मुआवजा दिया जाएगा हमे नही मालूम की कितनो को मुआवजा मिला है । खराब इन्फ्रास्ट्रक्चर ऊपर से बार बार बिजली का बाधित होना समस्तीपुर में ही नही पूरे बिहार का रोना है । बरसात के समय तो बिजली का जाना एक आम प्रक्रिया है बिजली के तारों को भूमिगत करने की योजना भूमिगत हो चुकी है । बिहार में प्रयाप्त से ज्यादा बिजली तो है मगर खराब सेवा और maintance की वजह से यह बिजली waste होता है और जब बिजली की सप्लाई ही बाधित रहेगी फिर होगा क्या ? बिजली सप्लाई हुई नही इसलिए उपभोक्ता का मीटर भी बंद फिर क्या होगा बिल और राजस्व में कमी देखने को मिलेगी और इसका सीधा नुकसान बिहार की सरकार को होगा । प्रयाप्त मात्रा में बिजली के होने के वावजूद भी हम बिजली को सुचारू नही कर पा रहे । मतलब 5g नेटवर्क तो आ गया मगर मोबाइल वही है पुराना कीपैड वाला फिर कैसे लोड बर्दास्त करेगा ! कई राज्य सरकारों ने बिजली के प्रीपेड मीटर पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा रक्खा है मगर नीतीश कुमार केंद्र सरकार की इस योजना को लागू करने में ऐरी चोटी का जोड़ लगाए हुए है जो करना चाहिए उस पर ध्यान ही नही देते एल एंड टी कम्पनी आजकल बिजली का प्रीपेड मीटर लगा रही है एक आरटीआई में पूछे जाने पर क्या सरकार बिजली के पोस्टपेड व्यवस्था को बंद कर देगी ? इस सवाल के ज़बाब में सूचना मौजूद ही नही है फिर ये जबरन होना चाहिए या ग्राहक की स्वेक्षा पर ये बड़ा सवाल है आने वाले दिनों में हो सकता है की सरकार कहे। जिनको भी पोस्टपेड कनेक्शन चाहिए वो आवेदन कर सकते हैं एक मोटी सिक्योरिटी का अमाउंट वसूल किया जाएगा फिर दिया जाएगा पोस्टपेड कनेक्शन जो लोग जबरन नही लगाने दिए उनकी चांदी हो जाएगी मतलब जिसकी लाठी उसकी भैंस यही है बिहार की हक्कित । आज के दौर में कितने पुलिस थानों में कितने सरकारी महकमों में पोस्टपेड मीटर लग गए जड़ा सूची प्रस्तुत करे बिहार सरकार वास्तव में एक्सपेरिमेंट के लिए ही जनता है और देश के नेता व्यज्ञानिक है कभी मुफ्त राशन देकर देखो कभी मुफ्त बिजली देखते है असर क्या होता है बढ़िया वोट मिलने पर योजना को जोड़ शोर से लागू किया जाता है और फायदा हो रहा हो अगर राज्य सरकार को तो दबी जुबान में ही सही मगर योजना बदस्तूर चलता रहता है । बहरहाल समस्तीपुर का सच यही है की पर्याप्त बिजली तो है मगर इन्फ्रास्ट्रक्चर सही नही होने की वजह से लगभग रोज ही बिजली घंटो तक नदारद कटी रहती है कुछ दिनों में तो पाया गया की 7 से 8 घंटे तक बिजली गोल रही लगातार जिसका डाटा आपको हमारे सोशल मीडिया हैंडल पर एमआईओ जाएगा बहरहाल अधिकारी मीटिंग कर रहे हैं नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कम्पनी का x हैंडल आपको प्रचार से भरा हुआ मिलेगा उम्मीद है कि एक दिन बिजली सुचारू होगी और समस्तीपुर को 24 घंटे बिजली मिलेगी हम उम्मीद कर सकते हैं और आखिर कर भी क्या सकते हैं